भारत के प्रधानमंत्री पद को अब तक कई लोगों ने सुशोभित किया है। जाहीर है सभी ने अपने कार्यकुशलता से देश को समृद्ध बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लेकिन चूंकि सबका व्यक्तित्व भिन्न होता है इसलिए सबके कार्यों में एकरूपता का अभाव होता है। इसी संदर्भ में हम भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और इससे ठीक पहले प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह में अंतर को समझने का प्रयास करेंगे। व्यक्तित्त्व के विभिन्न पहलुओं को एक-एक करके देखते हैं कि दोनों लोगों में क्या बुनियादी फर्क है।

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व्यक्तित्व

डॉ. मनमोहन सिंह: - ये स्वभावतः बेहद शांत एवं सौम्य प्रकृति के व्यक्ति हैं। भाषण देने या सामान्य बातचीत के दौरान भी ये एकदम सामान्य ढंग से बोलते हैं। शब्दों के भाव पर इनकी पकड़ नहीं है। हालांकि विद्वान हैं तो इनके कथन सीधे सपाट भले ही हों लेकिन तथ्यों से भरपूर होते हैं।

नरेंद्र मोदी: - ये बहुआयामी व्यक्तिव के स्वामी हैं। माहौल के अनुसार खुद को ढाल लेना ही इनकी सबसे बड़ी खासियत है। अपनी बातों से जनता को मुग्ध कर देने की इनकी कला के कारण ही इनकी लोकप्रियता अपेक्षाकृत ज्यादा है। शब्दों के भावों को जीते हुये बोलते हैं जिससे श्रोताओं में भी एक तरह की उत्तेजना आ जाती है।

कार्यशैली

डॉ. मनमोहन सिंह: - इनकी कार्यशैली भी इनके व्यक्तिव की ही तरह बहुत सामान्य है। ये अपने काम पर ही केन्द्रित रहते हैं। जबकि लोकतान्त्रिक देश के नेताओं में जनता से संवाद कायम रखना भी आवश्यक है। लेकिन इनके अब तक के काम बहुत ही व्यापक और मौलिक साबित हुये हैं। भारत के अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में इनके योगदान की विपक्ष भी सराहना करता है। प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए इन्होंने मीडिया के माध्यम से जनता से कई बार संपर्क किया लेकिन सीधे-सीधे जनता से नहीं जुड़ सके।

श्री नरेंद्र मोदी: - ये चुस्त और अनुशासित कार्यशैली का अनुसरण करते हैं। हमेशा सक्रिय रहते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी इनका लगातार सक्रिय रहना लोगों को प्रेरित करता है। ये साहस के साथ जोखिम ले सकते हैं। इसका उदाहरण हम नोटबन्दी के इनके फैसले में देख चुके हैं। तमाम आलोचनाओं और परेशानियों के बावजूद ये फैसले से पीछे नहीं हटे। ‘मन की बात’ जैसे रेडियो कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने सीधे-सीधे जनता से संवाद कायम किया है।

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निष्कर्ष

प्रधानमंत्री मोदी और मनमोहन सिंह के बीच के अंतर को समझने के लिए हमें दोनों के जीवन संघर्षों को भी ध्यान में रखना चाहिए। नरेंद्र मोदी जहां बेहद निचले तबके से प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचने वाले व्यक्ति हैं वहीं दूसरी तरफ डॉ. मनमोहन सिंह माध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। कुल मिलकर देखा जाए तो नरेंद्र मोदी मुखर स्वभाव के हैं वहीं डॉ. मनमोहन सिंह शर्मीले और संकोची स्वभाव के जान पड़ते हैं।


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